लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू क्यो ?

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लक्ष्मी का वाहन उल्लू क्यों?
भगवान विष्णु की प्रिय लक्ष्मी गुरुड़ पर बैठकर अपने भक्त के यहां धार्मिक कृत्य होने पर सदा आती हैं। परंतु जब कोई मात्र लक्ष्मी का ही ध्यान करता है। सतर्माग को छोड़कर, साम-दाम-दण्ड का भेद से मात्र लक्ष्मी को ही जीवन का उद्देश्य बना लेता है तो वह व्यक्ति चरित्रहीन होकर श्री हीन हो जाता है। ऐसे व्यक्ति के यहां लक्ष्मी उल्लू पर बैठकर अकेली ही आती है। उल्लू अमंगल कारक पक्षी है। जबकि गरुड़ जी सर्व अमंगलों के नाशक हैं। तथा भगवान विष्णु तथा लक्ष्मी जी के परम पुनीत वाहन है।

अत:जहां जप-पूजा पाठ, देव पितृ कर्म दान पुण्य व अतिथि सत्कार होता हैं वहां लक्ष्मी विष्णु सहित गरुड़् जी पर सवार होकर पघाटी है। और जहां अनाचार, पापाचार, अत्याचार, शराब, वेश्यामगन डॉक्टर, वकील व मुकद्दमेबाजी में रुपया खर्च हो तो जानों की लक्ष्मी अकेली उल्लू पर बैठकर आयी हैं।

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