कोई दीवाना कहता है – कुमार विश्वास(Koi Diwana kehta hai- Kumar Vishwas) 


कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !

मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!

मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !

ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!


मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !

कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!

यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !

जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!


समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !

यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!

मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !

जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!


भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!

हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!

अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!

मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!

मैं कल रात नहीं रोया था -हरिवंशराय बच्चन ( Mai kal raat nahi roya tha-Harivansh Rai Bachhan)

​मैं कल रात नहीं रोया था
दुख सब जीवन के विस्मृत कर,

तेरे वक्षस्थल पर सिर धर,

तेरी गोदी में चिड़िया के बच्चे-सा छिपकर सोया था!

मैं कल रात नहीं रोया था!
प्यार-भरे उपवन में घूमा,

फल खाए, फूलों को चूमा,

कल दुर्दिन का भार न अपने पंखो पर मैंने ढोया था!

मैं कल रात नहीं रोया था!
आँसू के दाने बरसाकर

किन आँखो ने तेरे उर पर

ऐसे सपनों के मधुवन का मधुमय बीज, बता, बोया था?

मैं कल रात नहीं रोया था!